सोनम वांगचुक के अनशन के बहाने यह संपादकीय भारतीय लोकतंत्र, जनआंदोलनों, सरकार की जवाबदेही और युवाओं की आकांक्षाओं पर गंभीर प्रश्न उठाता है। साथ ही यह कौशल-आधारित शिक्षा, प्रकृति के साथ संतुलित विकास और नए सामाजिक नेतृत्व की आवश्यकता पर विचार प्रस्तुत करता है।
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If you could have dinner with any fictional character, who would it be? Shahrukh khan
जब एक बेटे की स्मृतियाँ बन गईं सैकड़ों बच्चों के सपनों की रोशनी
जब एक बेटे की स्मृतियाँ बन गईं सैकड़ों बच्चों के सपनों की रोशनी
तन्मय फाउंडेशन: शिक्षा के माध्यम से समाज में बदलाव की एक प्रेरक पहल
38 वर्षों से मानवता की सेवा का पर्याय बना अंकितग्राम सेवाधाम आश्रम
36 वर्षों की सेवा यात्रा का प्रेरक उत्सव—अंकितग्राम सेवाधाम में मानवीय शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समर्पण का अनूठा संगम।
बाजपेयी जी की कचौड़ी: एक दोना, दो कचौड़ियाँ और पूरा लखनऊ
लखनऊ में एक कहावत-सी सुनने को मिलती है—“हुज़ूर, शहर को समझना है तो उसकी रसोई तक जाइए।” शायद यही वजह है कि इस शहर की पहचान सिर्फ़ टुंडे के कबाब या मक्खन मलाई तक सीमित नहीं है। सुबह के लखनऊ की अपनी एक अलग थाली है, और उस थाली का सबसे आत्मीय स्वाद है—बाजपेयी जी की गरमागरम कचौड़ी।
फर्रुखाबाद का नमकीन उद्योग: स्वाद की विरासत…
या फर्रुखाबाद का नमकीन उद्योग अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच पाया है?
शर्मा जी की चाय: कुल्हड़ में उबलती लखनऊ की तहज़ीब, गोल समोसों में बसती यादों की विरासत
आज भी सुबह होते ही यहां कुल्हड़ों से उठती चाय की भाप, मक्खन से लबालब बन-मक्खन और ताज़ा तले गोल समोसों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींच लाती है। दुकान के बाहर लगी कतारें इस बात का प्रमाण हैं कि स्वाद का रिश्ता समय से नहीं, भरोसे से बनता है।
Queen’s College, Indore Students Visit MCVK for an Educational Study Tour
Queen’s College, Indore Students Visit MCVK for an Educational Study Tour
फर्रुखाबाद का मशहूर पपड़िया आलू: स्वाद जो यादों में बस गया
फर्रुखाबाद का पपड़िया आलू केवल एक स्ट्रीट फूड नहीं है, बल्कि यह शहर की सामूहिक स्मृतियों, अपनत्व और स्थानीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।