दिवंगत अंकित की 42वीं जयंती पर सेवा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय शिक्षा का प्रेरक आयोजन




लेखक : मोहित धवन
उज्जैन, 22 जुलाई। सेवा, संवेदना और मानवीय मूल्यों को समर्पित अंकितग्राम सेवाधाम आश्रम में दिवंगत अंकित की 42वीं जयंती के अवसर पर सेवा, सम्मान, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता से जुड़े विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मानव चेतना विकास केंद्र (MCVK) के संस्थापक अजय दायमा रहे। उन्होंने दिवंगत अंकित की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया तथा पौधारोपण कर 45 दिवसीय राष्ट्रीय हरित अभियान का शुभारंभ किया।
अपने प्रेरक उद्बोधन में अजय दायमा ने कहा कि आज समाज जिस व्यवस्था को शिक्षा मान रहा है, वह वास्तविक शिक्षा नहीं, बल्कि केवल साक्षरता है। उन्होंने कहा कि डिग्री प्राप्त कर लेना, प्रशिक्षण हासिल कर लेना अथवा डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस या अन्य किसी प्रतिष्ठित पद तक पहुँच जाना व्यक्ति को केवल पेशेवर बनाता है, लेकिन वास्तविक अर्थों में शिक्षित नहीं बनाता।
उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता ने पशु-पक्षियों, प्रकृति, चाँद, अंतरिक्ष, चिकित्सा विज्ञान और अनेक विषयों पर गहन अध्ययन किया है, लेकिन आज तक मनुष्य ने स्वयं मनुष्य को समझने का गंभीर प्रयास नहीं किया। यही कारण है कि भौतिक प्रगति के बावजूद समाज में तनाव, असंतोष और रिश्तों में दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने कहा, “जिस दिन हम मनुष्य को समझना सीख जाएंगे और यह जान जाएंगे कि समाधान, समृद्धि और खुशहाली के साथ एक-दूसरे के साथ कैसे जीना है, उसी दिन हम वास्तविक अर्थों में शिक्षित कहलाएँगे।”
अजय दायमा ने बताया कि मानव चेतना विकास केंद्र (MCVK) वर्षों से इसी मानवीय शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि MCVK से जुड़े लोगों ने समाज के सामने ऐसा जीवन मॉडल प्रस्तुत किया है, जहाँ धन कमाने की अंधी दौड़, वेतन की चिंता या भविष्य की असुरक्षा के बजाय समाधान, समृद्धि, सहयोग, विश्वास और खुशहाली के साथ सामूहिक जीवन जीने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने सेवाधाम से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं और सदस्यों का आह्वान किया कि वे MCVK आकर इस जीवन मॉडल को समझें और अनुभव करें। उनका कहना था कि यदि यह मानवीय शिक्षा का मॉडल व्यापक स्तर पर समाज तक पहुँचा, तो सेवाधाम जिन हजारों लोगों के जीवन से जुड़ा है, उन्हें केवल सेवा ही नहीं, बल्कि बेहतर इंसान बनने की दिशा भी मिल सकेगी।
कार्यक्रम में आश्रम के संस्थापक सुधीर भाई गोयल ने कहा कि अंकितग्राम सेवाधाम आश्रम पिछले 38 वर्षों से निराश्रित, दिव्यांग, परित्यक्त महिलाओं, बेसहारा बुजुर्गों और बच्चों की सेवा में समर्पित है। वर्ष 1989 में स्थापित इस संस्था ने अब तक 10 हजार से अधिक लोगों को आश्रय, चिकित्सा, शिक्षा, पुनर्वास और सम्मानपूर्ण जीवन प्रदान किया है। वर्तमान में आश्रम में एक हजार से अधिक लोग निवास कर रहे हैं, जिनमें नवजात शिशुओं से लेकर 90 वर्ष तक के बुजुर्ग शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि आश्रम में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को परिवार जैसा वातावरण दिया जाता है। कई ऐसे सदस्य, जो कभी स्वयं आश्रम के आश्रित थे, आज स्वस्थ होकर यहीं दूसरों की सेवा कर रहे हैं। यह सेवाधाम की पुनर्वास व्यवस्था की सबसे बड़ी सफलता है। उन्होंने यह भी बताया कि आश्रम के अनेक बच्चे योग, संगीत, कला और खेलों में असाधारण प्रतिभा रखते हैं तथा उचित मार्गदर्शन मिलने पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँच सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान सेवाधाम परिवार ने MCVK से आए अतिथियों का पारंपरिक रूप से पगड़ी एवं दुशाला पहनाकर सम्मान किया। इसके बाद अतिथियों ने आश्रम का भ्रमण कर विभिन्न सेवा गतिविधियों, चिकित्सा व्यवस्था और पुनर्वास कार्यों का अवलोकन किया।
इस अवसर पर सेवाधाम के बच्चों ने योग एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। साथ ही 22 जुलाई से 4 सितंबर तक चलने वाले 45 दिवसीय राष्ट्रीय हरित अभियान का शुभारंभ किया गया। अभियान के अंतर्गत प्रतिदिन एक लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया गया है। इसी दौरान गुरुग्राम के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एवं ‘ट्री मैन’ डॉ. दीपक रमेश गौर को सेवाधाम के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत राष्ट्रीय ग्रीन एम्बेसडर नियुक्त किए जाने की घोषणा भी की गई।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में सेवाधाम की ओर से कांता बहन, मोनिका गौरी, मंजू बनवासी, सचिन गोयल, अनीता जी, पार्थ गोयल एवं कोमल गोयल ने विशेष भूमिका निभाई। वहीं MCVK की ओर से आलोक धवन, अंजली, श्रुति धवन, सुमन जी, सोनू सचान, योग्या भूमि, शिवानी एवं दीक्षा ने सहभागिता करते हुए सेवा कार्यों का अवलोकन किया।
उल्लेखनीय है कि अंकितग्राम सेवाधाम आश्रम की अध्यक्षता समय-समय पर हिन्दी साहित्य की अनेक प्रतिष्ठित विभूतियों ने की है। इनमें राष्ट्रकवि डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ तथा प्रख्यात साहित्यकार डॉ. वेदप्रताप वैदिक जैसे सम्मानित नाम शामिल रहे हैं। वर्तमान में संस्था के अध्यक्ष डॉ. ऋषि मोहन भटनागर हैं। दिवंगत अंकित की 42वीं जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम सेवा, मानवीय शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के समन्वय का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया।