जब एक बेटे की स्मृतियाँ बन गईं सैकड़ों बच्चों के सपनों की रोशनी

तन्मय फाउंडेशन: शिक्षा के माध्यम से समाज में बदलाव की एक प्रेरक पहल

लेखक : मोहित धवन
लखनऊ | 24 जुलाई, 2026

जीवन में कुछ ऐसी घटनाएँ घट जाती हैं जो किसी भी परिवार को भीतर तक झकझोर देती हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने सबसे बड़े व्यक्तिगत दुःख को समाज के लिए नई आशा और नई ऊर्जा में बदल देते हैं। लखनऊ स्थित तन्मय फाउंडेशन इसी मानवीय संवेदना, सेवा और सकारात्मक सोच का एक प्रेरक उदाहरण है। यह संस्था केवल एक सामाजिक संगठन नहीं, बल्कि एक माता-पिता के अपने बेटे के प्रति प्रेम और समाज के प्रति दायित्व का जीवंत स्वरूप है।

30 जुलाई 2023 का दिन देश दीपक शर्मा और नंदिता शर्मा के जीवन में ऐसा दर्द लेकर आया जिसकी कल्पना भी कोई माता-पिता नहीं करना चाहते। उनके इकलौते पुत्र तन्मय शर्मा का मात्र 25 वर्ष की आयु में आकस्मिक निधन हो गया। तन्मय एक मेधावी, संवेदनशील और होनहार युवा थे। उन्होंने देहरादून से एमबीए की शिक्षा पूरी करने के बाद हाल ही में प्रतिष्ठित वैश्विक कंपनी डेलॉइट (Deloitte) में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की थी। उनका भविष्य उज्ज्वल था और परिवार ने उनके लिए अनेक सपने संजोए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

उस समय उनके पिता देश दीपक शर्मा एक प्रतिष्ठित बेल्जियम की कंपनी में एशिया प्रमुख (Head – Asia) के पद पर कार्यरत थे। बेटे के असमय निधन ने पूरे परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया। ऐसे कठिन समय में अधिकांश लोग अपने दुःख तक ही सीमित रह जाते हैं, लेकिन शर्मा दंपत्ति ने अपने बेटे की स्मृतियों को समाज सेवा से जोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने संकल्प लिया कि तन्मय का नाम केवल परिवार की यादों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन बच्चों के जीवन में जीवित रहेगा जिन्हें शिक्षा और अवसरों की सबसे अधिक आवश्यकता है। इसी संकल्प से तन्मय फाउंडेशन की स्थापना हुई।

फाउंडेशन का मूल विश्वास है कि किसी व्यक्ति की सबसे सच्ची श्रद्धांजलि उसके नाम पर स्मारक बनाना नहीं, बल्कि ऐसा कार्य करना है जो समाज में स्थायी परिवर्तन लाए। इसी सोच के साथ संस्था ने शिक्षा को अपना प्रमुख माध्यम बनाया। उनका मानना है कि शिक्षा केवल पुस्तकों का ज्ञान नहीं देती, बल्कि आत्मविश्वास, सोचने की क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और जीवन को नई दिशा देने का माध्यम भी बनती है।

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अनेक ऐसे बच्चे हैं जो प्रतिभाशाली होने के बावजूद संसाधनों, मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव में अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुँच पाते। तन्मय फाउंडेशन ने इसी चुनौती को अपना कार्यक्षेत्र बनाया है। संस्था पहली से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने, उनके समग्र विकास को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें एक ऐसा वातावरण देने का प्रयास कर रही है जहाँ वे आत्मविश्वास के साथ सीख सकें और अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए फाउंडेशन ने ग्रामीण क्षेत्रों में ‘तन्मय स्टडी सेंटर्स’ की शुरुआत की। वर्तमान में ऐसे छह अध्ययन केंद्र पूरी सक्रियता के साथ संचालित हो रहे हैं। यहाँ प्रतिदिन शाम चार बजे से छह बजे तक नियमित कक्षाएँ लगती हैं। ये केंद्र केवल अतिरिक्त पढ़ाई का स्थान नहीं हैं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण और सीखने की संस्कृति विकसित करने का माध्यम भी हैं।

इन स्टडी सेंटर्स की सबसे बड़ी विशेषता उनका अनूठा शिक्षण मॉडल है। बच्चों को पढ़ाने का दायित्व उन स्थानीय युवाओं को सौंपा गया है जिन्होंने बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण की है और स्वयं विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इससे ग्रामीण बच्चों को अपने ही क्षेत्र के प्रेरित और ऊर्जावान शिक्षक मिलते हैं, जबकि युवाओं को समाज सेवा के साथ-साथ नेतृत्व और शिक्षण का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होता है। यह मॉडल समुदाय को स्वयं अपने विकास की प्रक्रिया का सहभागी बनाता है।

शिक्षा की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए फाउंडेशन ने यह व्यवस्था बनाई है कि एक शिक्षक अधिकतम 25 विद्यार्थियों को ही पढ़ाएगा। इससे प्रत्येक बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान दिया जा सकता है और उसकी शैक्षणिक प्रगति पर निरंतर निगरानी रखी जा सकती है। यही व्यवस्था इन अध्ययन केंद्रों को सामान्य ट्यूशन कक्षाओं से अलग पहचान देती है।

तन्मय फाउंडेशन का प्रयास केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है। संस्था बच्चों के बौद्धिक, मानसिक और शारीरिक विकास को समान महत्व देती है। प्रत्येक अध्ययन केंद्र पर कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी डिजिटल शिक्षा से जुड़ सकें। बच्चों में पढ़ने की आदत और सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए प्रेरणादायक कहानी-पुस्तकों की लाइब्रेरी बनाई गई है। साथ ही उनके शारीरिक विकास, टीम भावना और आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए खेल सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक संसाधनों की कमी अक्सर बच्चों की शिक्षा में सबसे बड़ी बाधा बनती है। इस चुनौती को समझते हुए तन्मय फाउंडेशन अध्ययन केंद्रों की लगभग सभी आवश्यकताओं का खर्च स्वयं वहन करता है। बच्चों को स्टेशनरी, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री, विशेष स्टडी सेंटर टी-शर्ट तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक संसाधन पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि कोई भी बच्चा केवल आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे।

इतना ही नहीं, इन केंद्रों में अपनी सेवाएँ देने वाले युवा शिक्षकों को भी नियमित रूप से सम्मानजनक मानदेय (ऑनरेरियम) प्रदान किया जाता है। इससे उनके कार्य का सम्मान भी होता है और वे पूरी निष्ठा एवं निरंतरता के साथ बच्चों का मार्गदर्शन कर पाते हैं।

तन्मय फाउंडेशन का विज़न केवल छह अध्ययन केंद्रों तक सीमित नहीं है। संस्था एक ऐसे समाज की कल्पना करती है जहाँ प्रत्येक बच्चे को उसकी आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों से परे समान अवसर प्राप्त हों। विशेष रूप से सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के बीच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्कृष्टता और सामुदायिक सहभागिता की संस्कृति विकसित करना फाउंडेशन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनका विश्वास है कि यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिलें, तो वही बच्चे भविष्य में अपने परिवार, अपने गाँव और पूरे समाज के विकास के वाहक बन सकते हैं।

आज तन्मय शर्मा भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका नाम उन सैकड़ों बच्चों की मुस्कान, उनकी पढ़ाई और उनके सपनों में जीवित है जो प्रतिदिन इन अध्ययन केंद्रों में नई उम्मीदों के साथ पहुँचते हैं। देश दीपक शर्मा और नंदिता शर्मा की यह पहल इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि व्यक्तिगत दुःख को भी समाज सेवा के संकल्प में बदला जा सकता है।

तन्मय फाउंडेशन आज केवल एक संस्था नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, शिक्षा और निस्वार्थ सेवा का एक सशक्त अभियान बन चुका है। यह पहल हमें विश्वास दिलाती है कि जब किसी परिवार का प्रेम समाज के कल्याण से जुड़ जाता है, तब वह केवल एक स्मृति को जीवित नहीं रखता, बल्कि अनगिनत बच्चों के भविष्य को भी नई रोशनी से आलोकित कर देता है। यही तन्मय शर्मा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है और यही इस प्रेरक यात्रा का सबसे सुंदर संदेश भी।

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